गीतांजलि एक अनुभवी लेखिका व कवयित्री हैं। छंद, लघु-कथा, लेख, शोध-पत्र, पाठ्यक्रम, भाषांतरण इत्यादि क्षेत्रों में अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रयोग करते हुए वे अब तक अनेक संकलनों की प्रतिभागी रह चुकी हैं व कई साहित्यिक मंचों पर सक्रिय रही हैं। इसके अतिरिक्त अब तक उनकी अपनी दस पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनकी विषय-वस्तु का केंद्र, मूल रूप से भारत की प्राचीन सभ्यता एवं संस्कृति, रहे हैं। वर्तमान पुस्तक इसी कड़ी में एक और प्रयास है।

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